Thursday, October 6, 2016

अहित आभाव ज़िन्दगी का

अहित आभाव ज़िन्दगी का 

क्योंकर हर अहित का सामना होता है 
जो सच नहीं  उसका दिखावा खूब होता है !

अयोग्य का सर्वोपरि विस्तार है।
जो योग्य है , उसका हर जगह दमन है !

अहित आभाव ज़िन्दगी का 

उदय तो उसका भी होता है ,जो कभी किसी का अभिप्राय न बना 
अवसान एक दिन हर अवधि का निशित ही होता है.. 

समय है जो आज किसी का वैरी  है , कल किसी का सहचर था  !
इसी तरह अयन को मन से न लगा बैठो !
जो इजाज़त लेकर कभी आया ही नहीं,  वह जाने  के लिए सम्मति क्यों  लेगा !!

अहित आभाव ज़िन्दगी का 

जिस तरह हर  लहर एक दूसरे से उतनी ही जुदा है !
जितना वह एक अंबुधि का अपरित्याज्य हिस्सा है !
अक्सर जटिल चट्टानो से मिल , अस्त्तिव को बैठती है !

अहित आभाव ज़िंगदगी का

अस्मिता सिंह 
१०/६/२०१६