Tuesday, April 1, 2008

अपनी दुनिया में दास्तान गम है,,,

अनपी दुनिया में दास्तान गम है॥
किस्मत से लड़कर कुछ नही मिला ....
किस्मत से बड़कर कुछ नही मिला...
मिल जाता है हर मोड़ पर गम का टुकडा....
कम नही होता कागज़ में लिपटा हुआ गम का वो टुकडा ...
कम नही होता हवा के साथ चलता गम का वो टुकडा...
कम नही होता हर पल प्रत्बिम्ब सा साथ चलता गम का वो टुकडा....
सोचा था गम की कोई ज़िंदगी होगी... जिया है तो साथ भी छोडेगा .....
पर अब तो लगता है अंत तक साथ रहेगा ज़िंदगी से जुडा
हर पल साथ चलता गम का वो टुकडा......

अस्मिता सिंह