Thursday, August 16, 2012

सोचो तो जान के दोहरया उन भाव को जिनको कभी सोचा था दोबारा दूर से भांपे की भी नहीं!!

ज़िन्दगी जब भी  इस तरह की हकीकत सामने लाती है कभी,
हर तरह से मुह फेर की भी आयना दिखा ही जाती है !
हर उस वजह से डर लगने लगता है,
जो उस वजह को दूंढ न पाने की नाकाम कोशिश रहती है !
क्या सच है क्या मिथ , क्या ठीक है और क्या गलत,
पता ही नहीं किसके नज़रिए से देखे किसे!
कभी उन किसी से कोई वास्ता भी नहीं रहा होगा,
फिर भी उन किसी की वजह ढूंडने में इतना वक़्त लगा दिया !
शायद जब सवालो के जवाब नहीं मिलते तो ,
तो इतनी अनजानी से घुटन होने लगाती  है !
क्या सच है क्या मिथ , कौन सही है कौन गलत
पता ही नहीं किसके नज़रिए से देखे किसे!
किस वजह से ये अविदित सी तलाश है,
जो पूरी होकर भी पूरी ना हो सकी !
फिर वही मज़ाक ज़िन्दगी ने किया , या आप वोह रास्ता ढूंढा
जिसपर आप  फिर वही फैसला लिया,
कैसे कह दे इतिहास न दोहराया किसी ने
की हर जगह वही किस्से  नज़र आना इतेफाक तो नहीं,
फिर भी किस्मत को फिर से ठुकराया किसी ने
जाने कब रुके ये किस्सा कहीं पर?
सोचो  तो जान के दोहरया उन भाव को जिनको कभी सोचा था दोबारा दूर से भांपे की भी नहीं!!

- अस्मिता सिंह 08.16.2012