Friday, August 19, 2011

हम छुपाते है तो सब हालlत चहरे से बयाँ हो जाते हैं...

 हम छुपाते है तो सब हालlत चहरे से बयाँ  हो जाते  हैं...
वो सब बात बता कर भी हर बात छुपा जाते हैं
कुछ हालत ऐसे की बातो में बयां नहीं होते
भाव छुपान की हर कोशिश नाकाम नज़र आती है
शब्दकोष में कुछ कमी सी महसूस होती ही क्या है...
हर अभिव्यक्क्ति अपना रास्ता निज ही ढूंढ लेती है...
और जो हालात  संभ्रम में छुपाने की कोशिश की थी 
 वोह अधूरी कोशिश बनकर रह जाती है
चहरा जो हालात बयाँ करता था.. उसपर यह नाकाम कोशिश एक और भाव लगा देती है

- अस्मिता सिंह