Monday, November 23, 2009

तुमसे रिश्ता

तुमसे मेरा रिश्ता कुछ इस तराह का हे,
जो तुम्हारे साथ होने पर ,मुझे मेरा  एहसास कराता  हे ..,
इसलिए क्योंकि तुम्हारे साथ से मुझे मेरी पअह्चान मिलती है
हर  उस लम्हे में वो पल छिपे होते हे ,
कुछ सीप में छिपे मोती की तरह
जो ऊपर से एक संतुलित सा मायिक परिवेश नज़र आता हे
पर अंदर जहाँ हर खवाइश हर सपने पुरे होते नज़र आते हे..
मानो धरती के उस किनारे पहुच गए हो जहाँ
आसमान और धरती के बीच सिर्फ एक धुंदली रेखा रह गयी हो
तुमसे मेरा रिश्ता कुछ इस तराह का हे ,
जो तुम्हारे साथ होने पर ,मुझे मेरा एहसास कराता हे ...